वो पैहला प्यार

वो पेहला प्यार जो शायद कभी हुआ ही नहीं
जिसके इंतज़ार में वक़्त बीता तो सही
पर कभी गुज़रा ही नहीं
धड़कन थमी बहुत मर्तबा
पर थमके कभी बढ़ी ही नहीं
वो पहला प्यार जो शायद कभी हुआ ही नहीं

वो एहसास जिसमें एक कसक सी हो
और उस कसक में भी आनंद आए
लमहें थमें और समये तेज़ी से गुज़रता जाए
जिसके छूने के एहसास भर से ही तपिश हो
और एक नज़र भर से घेरी सी कशिश भी
वो पहला प्यार जो शायद कभी हुआ ही नहीं

वो जो खुद की ख़ूबसूर्ति का एहसास दिलाए
अपने आप पे थोड़ा ही सही पर घमंड तो कराए
आयिने की ज़िंदगी में नयी अहमीयत हो
और घण्टों ख़यालों में खो जाने की आदत भी

वो पहला प्यार जो शायद कभी हुआ ही नहीं
वक़्त बीता तो सही पर कभी गुज़रा ही नहीं

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